बैज का आदिवासियों को गैर हिन्दू बताना मिशनरियों के षड्यंत्र का हिस्सा : मरकाम


00 कांग्रेस औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त आदिवासियों में फूट डालने की कर रही है साजिश 
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी अजजा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष विकास मरकाम ने आदिवासियों को गैर हिन्दू बताने व उनके लिए पृथक धर्म कोड की मांग के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। श्री मरकाम ने कहा कि यह न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय को हिंदू समाज से अलग करने और भारत की सांस्कृतिक एकता को कमजोर करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है।

उन्होंने कहा कि यह बयान कांग्रेस की उस पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है, जो “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत आदिवासियों को उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से अलग करने की कोशिश करती है। यह स्पष्ट तौर पर स्थापित सत्य और तथ्य है कि आदिवासी न केवल हिंदू हैं, बल्कि वे सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के मूल आधार हैं। भारत की संविधान सभा में इस औपनिवेशिक षड्यंत्र को स्पष्ट रूप से खारिज किया गया था। संविधान सभा में हमारे सभी आदिवासी नेताओं ने एक स्वर से जोर देकर कहा था कि आदिवासियों की संस्कृति और विश्वास सनातन धर्म का हिस्सा हैं। आदिवासियों को पृथक धर्म के रूप में वर्गीकृत करना ब्रिटिशों की विभाजनकारी नीति का हिस्सा था। श्री मरकाम ने कहा, “हमारी परंपराएं और विश्वास हिंदू धर्म के व्यापक दायरे में आते हैं, और हमें अलग करने का कोई औचित्य नहीं है।”

मरकाम ने कहा कि संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बीआर अम्बेडकर, केएम मुंशी जैसे नेताओं ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों को पृथक धर्म के रूप में मान्यता देना औपनिवेशिक नीतियों का अवशेष है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। संविधान सभा ने यह सुनिश्चित किया कि आदिवासियों को हिंदू धर्म के अंतर्गत ही मान्यता दी जाए, और पृथक धर्म कोड की अवधारणा को खारिज कर दिया गया। श्री मरकाम ने कहा कि ये ऐतिहासिक तथ्य और सत्य बैज के दावों को पूरी तरह न केवल खारिज करता है बल्कि ऐसा कहकर बैज संविधान सभा और बाबा साहेब के विचारों का खुला अपमान कर रहे है। कांग्रेस की विभाजनकारी और अवसरवादी राजनीति कांग्रेस का यह दावा कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं, उनकी पुरानी “विभाजन और शासन” की नीति का हिस्सा है। कांग्रेस ऐसी बयानबाजी के जरिए आदिवासियों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा नेता श्री मरकाम ने कांग्रेस काल में आदिवासियों की दयनीय स्थिति को याद दिलाते हुए कहा, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शासनकाल में आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, और सड़कों का विकास न के बराबर था। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों, आदिवासी संग्रहालयों, और वन धन योजना के माध्यम से आदिवासियों के सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया है। ऐसे समय में बैज का यह बयान आदिवासियों के बीच भय और भ्रम पैदा करने का प्रयास है। यह न केवल आदिवासी समुदाय का अपमान है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता पर हमला है। आदिवासियों को गुमराह करने और उन्हें हिंदू समाज से अलग करने की कांग्रेसियों की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।


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