खेलकूद की दुनिया में असफल होने पर अनेक कारण गिनाये जाते है। सदियो बीत गये परंतु खिलाडियों के चयन से लेकर निर्णायकों की भूमिका को कई बार शंका की दृष्टि से देखा जाता है। खेल प्रतियोगिताओं में जय या पराजय से बढ़कर खेल भावना को सम्मान दिया जाना चाहिए। अक्टूबर 2025 की प्रथम सप्ताह में इंदौर के गोल्डन इंण्टरनेशनल स्कूल परिसर में 22वीं सीनियर रोलबॉल बैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ जिसमें पुरुष वर्ग में विभिन्न राज्यों की 21 तथा महिला वर्ग में 16 टीम ने भाग लिया। पैर में जूते की जगह चकरी वाले जूते जिसे स्केट कहा जाता है। उसे पहनकर गेंद को स्केटिंग करते हुए 20×40 मीटर के हार्ड कोर्ट में स्केटिंग के सहारे गेंद को चलायमान रखते हुए एक दूसरे साथी खिलाडी को पास, श्रो, ट्रिबल किया जाता है फिर मौका देखकर विपक्षी के गोलपोस्ट के अंदर गौल कीपर को छकाते हुए गेंद को गौल में डाल दिया जाता है। नियम अनुसार जो दल अधिक गोल करता है वह विजयी घोषित होता है।
17 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाडियों की स्पर्धा में स्केटिंग के जरिये रोलबॉल के इस खेल में रोमांचक क्षण आते हैं। गोलकीपर गोलपोस्ट पर अकेला होता है। सारे डिफेन्डर पिछे छूट जाते है तब आक्रमण करने वाले के लिये परीक्षा की घड़ी आती है। कैसे करें अपनी रफ्तार पर काबू? कैसे बनाये रखे गेंद को अपने कब्जे में? फिर कैसे करें गति पर नियंत्रण? ये सब कुछ हो गया तो गोलकीपर को छकाकर गंद को गोलपोस्ट के अंदर डालने की रणनीति तुरंत तुरंत बनाई जाती है। इस तरह गोलकीपर और आक्रमण करने वाले दोनों खिलाडी के लिये त्वरित निर्णय, सही पूर्वानुमान लगाने का अवसर आता है. गेंद को गोत्र में जाने से बचाने या गेंद को गोल में डालने हेतु सटीक निशाना लगाने का निर्णय लेना होता है इसमें शक्ति, फुर्ति, मानसिक संतुलन का विशेष महत्व होता है।
इस तरह रोलबॉल के खेल में खिलाती को शारीरिक व मानसिक रूप से फौट होना पूर्णतया अनिवार्य है। 40 मीटर लंबे 20 मीटर चौड़े कड़े सतह वाले खेलक्षेत्र में खेला जाने वाला यह खेल अपनी तेज गति कम समय में परिणाम, स्पष्ट नियम की वजह से 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में पुरी तरह दुनिया के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
इंदौर में 22वीं सीनियर राष्ट्रीय स्पर्धा के दौरान अनेक राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाडी उभरकर आये है केन्द्र सरकार का खेल मंत्रालय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, के खेलों को बढ़ावा देने और खिलाडियों को संरक्षण देने की नीति का पालन कर रहा है। भारत में रोलबील के खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लिये जाने की परंपरा आरंभ हो चुकी है। इंदौर में सम्पन्न रोलबॉल के राष्ट्रीय चैम्पियनशिप 2028 के दौरान नारी शक्ति के सम्मान का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। इस टूर्नामेंट में खेले गये लड़कियों के सभी मुकाबलों के निगायक और संचालनकर्ता सिर्फ महिलाएं ही थी।
सिर्फ 23-24 वर्ष की उम्र में रोलबॉल ने जो उपलब्धि हासिल की है उसका श्रेय इस खेल के जनक राजू दभाडे को जाता है राजू की दूरदर्शिता, समर्पण, मेहनत य लगन में उनके निकट के मित्र परिवार के सदस्यों के योगदान को भूला नहीं जा सकता। एक तरफ खेल को संसार के सभी महाद्विपो में पहुंचाना दूसरी तरफ खेल जुड़े मैदान के अंदर व बाहर के लिये जरूरतमंद सहयोगियों को प्रशिक्षित करने का कार्य उनके नेतृत्व में निरंतर चल रहा है।
अतः 22वीं राष्ट्रीय स्पर्धा सफलतापूर्वक संपन्न होने में कोई कठिनाई नहीं हुई जिसमें महिला वर्ग का खिताब उत्तरप्रदेश की टीम ने 3 बार की चैम्पियन राजस्थान की टीम को पराजित कर जीता जबकि 20 वर्षों के अंत्तराल के पश्चात् महाराष्ट्र की पुरुष टीम विजेता बनी।
जसवंत कुमार मलाकियस वरिष्ठ खेल पत्रकार, टी.वी. कमेंटेटर
जोसफ टाउन, अमलीडीह,
पी.आ रविग्राम, रायपुर (छ.ग.) 492001
