- संसद में उठाया राज्य और देश का गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा; केंद्र सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को दिए कठोर कार्रवाई के निर्देश
- लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया विषैले SPL का मुद्दा, सरकार ने कहा— कोयले में मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी
- जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा पर संसद में बृजमोहन अग्रवाल की आवाज, विषैले औद्योगिक कचरे पर सख्त कार्रवाई की मांग
रायपुर / नई दिल्ली । वरिष्ठ भाजपा नेता एवं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एल्युमिनियम संयंत्रों से निकलने वाले अति-विषैले अपशिष्ट ‘स्पेंट पॉट लाइनिंग’ (SPL) के अवैध निपटान, वाणिज्यिक कोयले में इसकी खतरनाक मिलावट और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे इसके घातक दुष्प्रभावों का मुद्दा उठाया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री सेऔद्योगिक इकाइयों द्वारा वाणिज्यिक कोयले में विषैले SPL को मिलाकर बेचे जाने की अवैध गतिविधियों पर जानकारी मांगी।
श्री बृजमोहन ने एल्युमिनियम क्षेत्र द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) रिपोर्टों के संदर्भ में विषैले कचरे से आम जनता के स्वास्थ्य को होने वाले गंभीर खतरों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने सीमेंट उद्योगों में SPL के सुरक्षित निपटान और पिछले 5 वर्षों में दर्ज किए गए उल्लंघनों का ब्योरा मांगा।
श्री अग्रवाल ने तृतीय पक्ष विक्रेताओं (Vendors) की विफलता की स्थिति में सीधे एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की वकालत की।
उन्होंने एल्युमिनियम संयंत्रों के आसपास रहने वाले नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के मौलिक अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
श्री अग्रवाल द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्नों के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक कोयले में विषैले SPL की मिलावट पूरी तरह से अवैध है और ऐसा करने वाली इकाइयों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
कोयले में SPL की मिलावट पूरी तरह प्रतिबंधित
सरकार ने स्पष्ट किया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 (Schedule-1, Item 11.2) के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट माना गया है। इसे वाणिज्यिक कोयले में मिलाना या बेचना कानूनन अपराध है। इसका निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स या TSDF सुविधाओं के जरिए ही संभव है।
सरकार ने जानकारी दी कि, नियमों के उल्लंघन पर संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को कारखानों को तुरंत बंद करने, भारी पर्यावरणीय जुर्माना लगाने और आपराधिक मुकदमा चलाने के पूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
सरकार ने बताया कि 1 जुलाई 2025 को अधिसूचित नए संशोधनों के तहत 1 अप्रैल 2026 से एल्युमिनियम उत्पादकों पर ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व’ (EPR) की व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब कंपनियों को सीपीसीबी (CPCB) के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य होगा और विषैले कचरे के रीसाइक्लिंग की पूरी जिम्मेदारी मूल उत्पादक कंपनी की होगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, छत्तीसगढ़ एक प्रमुख औद्योगिक राज्य है, जहाँ कई बड़े एल्युमिनियम स्मेल्टर और संयंत्र संचालित हो रहे हैं। विकास आवश्यक है, लेकिन हमारे नागरिकों के स्वास्थ्य और छत्तीसगढ़ की पावन धरा की पर्यावरण सुरक्षा की कीमत पर नहीं। विषैले स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) को कोयले में मिलाकर बेचना हमारे पानी, हवा और मिट्टी के साथ-साथ आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ है।
संसद में सरकार के जवाब से यह साफ हो गया है कि इस प्रकार की मिलावट पूरी तरह गैर-कानूनी है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि मैं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अपेक्षा करता हूँ कि वे छत्तीसगढ़ के एल्युमिनियम संयंत्रों, तृतीय-पक्ष विक्रेताओं और सीमेंट भट्टियों की सख्त निगरानी करें। यदि कोई भी इकाई नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उस पर केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि संयंत्र को सील करने और आपराधिक मामला दर्ज करने जैसी ठोस कार्रवाई की जाए। छत्तीसगढ़ के नागरिकों को स्वच्छ हवा और पानी देना हमारी पहली प्राथमिकता है।”
