सुकमा। जिले के एलमागुंडा का इलाका दुर्गम और नक्सल प्रभावित है। कभी जंगलों में भटककर नक्सली गतिविधियों में शामिल रहने वाला एलमागुंडा निवासी सोड़ी हुंगा आज अपने नए पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहा है। कठिन चुनौतियों और सीमित सुविधाओं के बावजूद परिवार की मदद से उन्होंने अपने आशियाने का सपना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पूरा कर दिखाया है। आत्मसमर्पित नक्सली का पक्का मकान न सिर्फ पुनर्वास की सफलता की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकार की योजनाएं समाज की मुख्यधारा से जोडऩे में कारगर साबित हो रही हैं।
सोड़ी हुंगा का कहना है पहले मैं नक्सली गतिविधियों में शामिल था, जहां हर पल जान का खतरा था। लेकिन आज मेरे परिवार के पास सुरक्षित घर है। यह नया जीवन है, नया विश्वास है। उन्होने कहा कि नक्सली जीवन में असुरक्षा और मौत का साया हमेशा साथ रहा। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ पाकर उन्हें 1,20,000 की सहायता से पक्का मकान मिल गया है।
