जगदलपुर। धान की फसल में इन दिनों पत्ती मोड़क व तनाछेदक का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे किसान परेशान हैं। किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कीटनाशक का लगातार छिड़काव कर रहे हैं। हालांकि कई किसान समय पर कीट प्रकोप की पहचान नहीं कर पा रहे हैं, जिससे फसल नुकसान हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस साल बस्तर में भारी बारिश हुई है, इसके बाद से ही धान की फसल में तेजी का कीट प्रकोप फैल रहा है। तीरथा के किसान रघु मौर्य व रतन कश्यप ने बताया कि इस साल लगातार भारी बारिश के कारण धान के पौधे का बढ़वार प्रभावित हुआ था। इसके बाद अब जब मौसम खुला तो कीट प्रकोप तेजी से फैल रहा है। किसान दुकानों से अलग-अलग तरह की कीटनाशक दवाएं खरीदकर छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन राहत नहीं मिल रही है।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक धान के खेतों की किसानों को इस समय नियमित निगरानी करते रहना चाहिए और पत्ती मोड़क का प्रकोप एक पौधे में एक से अधिक दिखाई देने पर क्लोरोप्यरीफोस 1 लीटर प्रति हेक्टर के दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा यदि तनाछेदक की तितली 1 वर्ग मीटर में एक से अधिक दिखाई देने पर फर्टेरा 10 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए, इससे प्रकोप से राहत मिलेगी।
