जगदलपुर। रियासत कालीन दौर में 75 दिवसिय बस्तर दशहरा पर्व बस्तरवासियों की सहायता से भव्य रूप से मनाया जाता था, वर्तमान में बस्तर दशहरा पर्व शासकीय हो जाने पर दशहरा पर्व मनाने प्रदेश सरकार के सामने हाथ फैलाना पड़ता है। शासकीय मदद के बावजूद दशहरा महापर्व समिति पर लगभग 65 लाख रुपए का कर्ज है। सरकारी करण के साथ ही इसके खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। बस्तर दशहरा 2023 में एक करोड़ 44 लाख 63 हजार 298 रुपए खर्च किए गए थे, जबकि दशहरा 2024 में 1 करोड़ 50 लाख 16 हजार रुपये खर्च किये गये। अब बस्तर दशहरा 2025 के लिए 2 करोड़ रूपये की मांग की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग बस्तर दशहरा के लिए अब तक मात्र 25 लाख रुपए ही प्रतिवर्ष देता आया है। मुख्य रस्में शारदीय नवरात्र के दौरान ही संपन्न होती हैं। बस्तर दशहरा संपन्न कराने कम से कम 20 हजार लोगों की भागीदारी रहती है, लेकिन सजावट, आतिशबाजी, शामियाना, बकरा शराब आदि पर मोटी राशि खर्च की जाती है, इसलिए उत्सव पर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ बस्तर दशहरा को भव्य बनाने लगातार खर्च बढ़ाया जा रहा है, पर आर्थिक मदद अब भी कम मिल रही है। बस्तर दशहरा के लिए आमतौर पर धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग, सार्वजनिक संस्थान सहित अन्य कुछ संस्थानों से आर्थिक मदद मिलती है, किंतु खर्च बढ़ाने के साथ सार्वजनिक संस्थाएं भी अपेक्षित मदद नहीं कर रहीं हैं। प्रदेश सरकार अब तक 25 लाख रुपए ही बस्तर दशहरा के लिए देती आई है, जिसे बढ़ाते हुए अब 50 लाख रूपये की घोषणा की गई है। शहर के वरिष्ठजनों का कहना है कि बस्तर दशहरा पर्व अब संस्कृतिक कम और आडंबर ज्यादा हो गया है, जिसमें बस्तर कहीं भी नजर नहीं आता। कुछ लोगों का आरोप है कि सप्लायर और समिति के कुछ लोगों में सांठ-गांठ है। इसके चलते भी खर्च बढ़ता जा रहा है, इस दिशा में सामूहिक विचार विमर्श किये जाने की जरूरत है।
