महासमुन्द जिले के 1 लाख 40 हज़ार उपभोक्ताओं को हॉफ बिजली बिल योजना में संशोधन से बड़ी राहत


00 सौर ऊर्जा योजना को भी मिल रहा अच्छा प्रतिसाद
महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से हॉफ बिजली बिल योजना में संशोधन किया गया है। अब इस योजना के तहत 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत की रियायत दी जाएगी। यह संशोधन राज्य सरकार की आम जनता को महंगाई से राहत देने और ऊर्जा के किफायती उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। महासमुन्द जिले में इस योजना से लगभग 1 लाख 40 हजार 393 सामान्य और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
जिले के 56 हजार 501 बीपीएल परिवारों को पूर्व की तरह 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रहेगी। ये परिवार हॉफ बिजली बिल योजना के अन्य लाभों के भी पात्र बने रहेंगे। इस योजना से विशेष रूप से ग्रामीण एवं निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। इसके समानांतर, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को भी जिले में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने पर अधिकतम 1,08,000 रूपए तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसमें एक किलोवॉट के सोलर प्लांट पर कुल 45 हजार रूपए सब्सिडी दी जाएगी। इसी प्रकार 2 किलोवॉट प्लांट पर 90 हज़ार और 3 किलोवॉट प्लांट पर 1 लाख 8 हज़ार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का साझा योगदान शामिल है। इसके लिए उपभोक्ताओं को बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें 6.3 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर आसान दस्तावेजों के साथ ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया अपनाई गई है।

अब तक जिले में 2,759 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 2,006 उपभोक्ताओं ने वेंडर का चयन कर लिया है। 319 घरों में सौर प्लांट स्थापित कर निरीक्षण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और 230 उपभोक्ताओं को सब्सिडी की राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। बाजार में 3 किलोवॉट के सोलर प्लांट की कीमत लगभग 1 लाख 80 हज़ार रुपये से 2 लाख 10 हज़ार रुपये तक है, जिसमें सब्सिडी घटाकर शेष राशि उपभोक्ताओं द्वारा वहन की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता वाले सोलर प्लांट से प्रति माह औसतन 240 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, जो कि पूर्ववर्ती हॉफ बिजली योजना के तहत मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट खपत पर 200 यूनिट की रियायत) से भी अधिक लाभकारी है। इसके माध्यम से उपभोक्ता न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेच आय अर्जित भी कर सकते हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य स


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