त्रिपुरेश्वरी मंदिर का भव्य नव-उत्सव: पीएम मोदी ने किया लोकार्पण, आस्था का नया सवेरा
एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना त्रिपुरा: माँ त्रिपुरेश्वरी का दिव्य दरबार अब नए रंग में-सोमवार का दिन त्रिपुरा के लिए बेहद खास रहा। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गोमती जिले में स्थित प्राचीन त्रिपुरेश्वरी मंदिर के नव-निर्मित स्वरूप का उद्घाटन किया। इस शुभ अवसर पर, उन्होंने स्वयं माँ त्रिपुरेश्वरी के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सभी के कल्याण की कामना की। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राज्यपाल श्री एन इंद्रसेना रेड्डी, मुख्यमंत्री श्री माणिक साहा और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। मंदिर परिसर भक्तों की अपार भीड़ से खचाखच भरा था, और अपने प्रिय प्रधानमंत्री को इतने करीब देखकर लोगों के चेहरों पर खुशी और श्रद्धा का अद्भुत भाव था।
500 साल की विरासत को मिला नया जीवन: आस्था का अटूट केंद्र-त्रिपुरेश्वरी मंदिर सिर्फ त्रिपुरा ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह पावन स्थल लगभग 500 वर्ष पुराना है, जिसे 1501 ईस्वी में महाराजा धान्य माणिक्य ने बड़े भक्ति भाव से बनवाया था। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक होने का गौरव प्राप्त है, जो इसे अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ माँ शक्ति की दिव्य ऊर्जा का वास है, जो आने वाले हर भक्त को आशीर्वाद, सकारात्मकता और बल प्रदान करती है।
PRASAD’ योजना का कमाल: 52 करोड़ की लागत से मंदिर का कायाकल्प-इस मंदिर का कायाकल्प केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘PRASAD’ (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive) योजना के तहत किया गया है। इस योजना के अंतर्गत, लगभग 52 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर को एक नया, भव्य और आधुनिक स्वरूप दिया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे देश के धार्मिक स्थलों का न केवल आध्यात्मिक उत्थान करना है, बल्कि उन्हें पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विकसित करना है। अब यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है।
भक्तों का जोश, गर्मी को मात: उत्सव का अद्भुत माहौल-उद्घाटन समारोह के दौरान, भीषण गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर और उसके आसपास मौजूद रहे। सभी की आँखें प्रधानमंत्री पर टिकी थीं, और मंदिर के इस नए रूप को देखने के लिए लोगों में गजब का उत्साह था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर का यह नया, भव्य रूप राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी मजबूत करेगा। इस पूरे अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
