नई दिल्ली । वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी को झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था। दिल्ली कोर्ट ने कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी के खिलाफ FIR करने से मना करने वाले मैजिस्ट्रियल कोर्ट के ऑर्डर को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पीकिंग ऑर्डर पास करने के लिए मामला वापस ACJM कोर्ट को भेज दिया है। साथ ही आदेश पारित करने और नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ठोस कारण नहीं बताया गया, इससे पता चलता है कि मामले पर ठीक से विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने के बजाय, मजिस्ट्रेट का आदेश नागरिकता के मुद्दे की ओर मुड़ गया। अदालत ने मामला फिर मजिस्ट्रेट को भेज दिया है।
बता दें कि कांग्रेस की दिग्गज नेत्री और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर 1980 के इलेक्टोरल रोल में जाली डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके अपना नाम जुड़वाने का आरोप है। पिछले दिनो राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने भारतीय नागरिकता लेने से पहले गलत तरीके से वोटर कार्ड बनाने के मामले में सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था।
दरअसल नागरिकता से जुड़ा विवाद उस समय उठा, जब वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता मिली, लेकिन इसके तीन साल पहले यानी 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम पहले से मौजूद था। याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में नाम केवल उन्हीं का शामिल हो सकता है, जिनके पास भारतीय नागरिकता हो, इसलिए 1980 की लिस्ट में एंट्री अपने आप में संदेह पैदा करती है। अब कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया और TCR मंगवाया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
