रायपुर। आरंग विकासखंड में महानदी पर बने हरदीडीह एनीकट के टूटने के मामले में विधानसभा में बड़ा खुलासा हुआ है। जल संसाधन विभाग ने सदन में स्वीकार किया है कि एनीकट में लीकेज और संरचनात्मक क्षति की जानकारी विभाग को पहले से थी। इसके बावजूद मरम्मत के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित रहे और समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए। नतीजतन बारिश और बाढ़ के दौरान एनीकट का करीब 240 मीटर हिस्सा टूटकर बह गया।
सरकार के जवाब के अनुसार, एनीकट के डाउनस्ट्रीम और सिस्टर्न में क्षति की जानकारी अधिकारियों को पहले ही मिल चुकी थी। इसके सुधार के लिए वर्ष 2024-25 के बजट में प्रस्ताव तैयार कर प्राक्कलन शासन को भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
सरकार
विभाग ने यह भी बताया कि 12 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी ने एनीकट की बॉडीवॉल में कई स्थानों पर लीकेज होने की सूचना कार्यपालन अभियंता को दी थी। इसके बाद 27 फरवरी 2026 को अधीक्षण अभियंता और मैदानी अमले ने स्थल का निरीक्षण भी किया।
विधानसभा में यह भी सामने आया कि तकनीकी सुधार के लिए गठित समिति ने मौके पर जाकर निरीक्षण तक नहीं किया। ऐसे में समय पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी उपाय नहीं हो सके, जिसके कारण मानसून और बाढ़ के दबाव में एनीकट का बड़ा हिस्सा ढह गया।
इस खुलासे के बाद मामले में विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। विपक्ष ने इसे गंभीर चूक बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
