नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने आज गुरुवार को हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। यह बातचीत उनके द्विपक्षीय रणनीतिक और वैश्विक सहयोग को बढ़ाने और मजबूत करने के संयुक्त प्रयास के तहत हुई। बातचीत के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बातचीत की। ये बातचीत भरोसे पर बनी खास साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में एक और कदम थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी अन्य अधिकारियों के साथ मौजूद थे।
अपनी यात्रा के दौरान, वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा और आपसी हित के क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
इससे पहले, राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री ताकाइची का औपचारिक स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हमारी खास साझेदारी को और मज़बूत करते हुए। प्रधानमंत्री तकाइची का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। यह भविष्य के लिए एक ऐसी साझेदारी है, जो भरोसे पर बनी है तथा साझे मूल्यों पर आधारित है।”
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित रिसेप्शन के दौरान, पीएम मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री से अपने कैबिनेट सहयोगियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का परिचय कराया। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर तकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।
अपनी यात्रा के दौरान, वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा और आपसी हित के क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन दोनों नेताओं को रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने का अवसर देगा।
प्रधानमंत्री ताकाइची की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त 2025 में टोक्यो में होने वाले 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद हो रही है और ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के मद्देनजर अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना जारी रखे हुए हैं।
