अबूझमाड़ के ‘अंधेरे’ में फूटी शिक्षा की किरण: आजादी के दशकों बाद मरकाबेड़ा में खुला पहला स्कूल


नारायणपुर। जिले के अबूझमाड़ का मरकाबेड़ा गांव कभी नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित था, अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। बस्तर में शांति और विकास के विस्तार के साथ अब शिक्षा की किरण भी दुर्गम इलाकों तक पहुंच रही है। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में पहली बार प्राथमिक शाला शुरू की गई है। ग्राम पंचायत गोमे अंतर्गत आने वाला मरकाबेड़ा लंबे समय तक विकास से अछूता रहा। यहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के गांवों तक जाना पड़ता था, जिससे अधिकांश बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते थे।
अब गांव में ही स्कूल खुलने से न केवल मरकाबेड़ा बल्कि कोरोसकोडो समेत आस-पास के गांवों के बच्चों को बड़ी राहत मिली है। स्कूल की शुरुआत आसान नहीं थी। संकुल समन्वयक, शिक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नदी-नालों और पहाड़ियों को पार कर कठिन परिस्थितियों में इस पहल को साकार किया। शाला प्रारंभ करने के साथ ही प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को निशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें और पोषक आहार वितरित किए गए।


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