3 दिसंबर को इंटरनेशनल आईडीईए की अध्यक्षता ग्रहण करेंगे ज्ञानेश कुमार


नई दिल्ली। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार भारत की ओर से 3 दिसंबर को स्वीडन में अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए की अध्यक्षता ग्रहण करेंगे। इंटरनेशनल आईडीईए एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसे 1995 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं को मजबूत करना है। वर्तमान में इसके 35 सदस्य देश हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान जैसे देशों को पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

यह संगठन समावेशी, लचीली और जवाबदेह लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने का काम करता है। भारत की अध्यक्षता निर्वाचन आयोग की वैश्विक पहचान और सफलता का प्रतीक है। भारत ने शुरुआत से ही इस संगठन के संचालन, लोकतांत्रिक संवाद और संस्थागत पहल में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारत का उद्देश्य इस संगठन के वैश्विक एजेंडे को आकार देना और चुनावी सुधारों को बढ़ावा देना है। अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए को 2003 से संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा भी प्राप्त है।

भारत अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए का संस्थापक सदस्य है और उसने शासन प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया है और चुनावी अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग किया है। 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए की अध्यक्षता ग्रहण करते समय चुनावी प्रशासन में अपने व्यापक अनुभव का लाभ उठाएगा और दुनियाभर में चुनाव प्रबंधन निकायों को मजबूत बनाने में योगदान देगा।

भारत का निर्वाचन आयोग, जो दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे विश्वसनीय चुनाव प्रबंधन निकाय है, अपनी सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को दुनियाभर के निर्वाचन निकायों के साथ साझा करेगा। इसके अलावा आईआईआईईडीएम (भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान) और आईडीईए के सहयोग से चुनावी हिंसा, गलत सूचना और मतदाताओं के विश्वास में कमी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कार्य किए जाएंगे। अब तक, आईआईआईडीईएम ने 28 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और लगभग 142 देशों के 3,169 चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। इस सहयोग के जरिए भारत निर्वाचन आयोग के नवाचारी प्रौद्योगिकीय उपायों और सर्वोत्तम पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

 


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