जगदलपुर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज शुक्रवार को बस्तर दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वे मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और सिरहासार भवन में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी। यहां वे बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े मांझी-चालकियों और जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगी। इसके बाद राष्ट्रपति लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी और आमसभा को संबोधित करेंगी।
राष्ट्रपति सुबह 10:30 बजे भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले वे मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होकर जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगी। इस दौरान उनके साथ दोपहर के भोजन का कार्यक्रम भी निर्धारित है।
मुरिया दरबार में पहली बार शामिल होंगी राष्ट्रपति
बस्तर दशहरे के दौरान आयोजित होने वाला मुरिया दरबार आदिवासी समाज की ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें मांझी-चालकियों सहित जनजातीय समाज के प्रतिनिधि एकत्रित होते हैं। इस दौरान समाज से जुड़े मुद्दों, समस्याओं और परंपराओं पर चर्चा की जाती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुरिया दरबार में भागीदारी को बस्तर की जनजातीय परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद वे लालबाग मैदान पहुंचकर बस्तर दशहरा प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी और आमसभा को संबोधित करेंगी।
सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम, ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। जगदलपुर एयरपोर्ट, सिरहासार भवन और मां दंतेश्वरी मंदिर के आसपास विशेष निगरानी रखी जाएगी। सुरक्षा कारणों से निर्धारित क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, 23 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक जगदलपुर एयरपोर्ट के 25 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर रोक रहेगी। वहीं, सिरहासार भवन और मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर के 3 किलोमीटर के दायरे में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं होगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों पर भी निर्धारित समय के दौरान आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगी और विशेष विमान से रायपुर होते हुए नई दिल्ली लौटेंगी।
क्या है बस्तर दशहरे की खासियत?
छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला अनूठा पर्व है। देश के अन्य हिस्सों में जहां दशहरे पर रावण दहन किया जाता है, वहीं बस्तर दशहरे में रावण का दहन नहीं होता। इस पर्व में आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना की जाती है और आदिवासी समाज अपनी प्राचीन परंपराओं के अनुसार विभिन्न रस्में निभाता है।
इस पर्व की प्रमुख रस्मों में पाट जात्रा, काछनगादी, जोगी बिठाई, मावली परघाव, भीतर रैनी, बाहर रैनी और मुरिया दरबार शामिल हैं। विशाल लकड़ी के रथ को खींचने की परंपरा भी बस्तर दशहरे का प्रमुख आकर्षण है।
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यहां की जनजातीय संस्कृति, सामाजिक एकजुटता और ऐतिहासिक परंपराओं का प्रतीक भी है। राष्ट्रपति का इस आयोजन में शामिल होना बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
