रायपुर, रायपुर सेंट्रल जेल से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें कैदियों ने जेल प्रहरियों पर वसूली, मारपीट और मुलाकात में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें दिखाए गए ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
एक वायरल वीडियो में एक कैदी अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाते हुए मारपीट का दावा करता नजर आ रहा है। कैदी का आरोप है कि बैरक बदलने या मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। वहीं वकील या स्वजन से मुलाकात कराने के लिए 5 से 7 हजार रुपये लेने का भी आरोप लगाया गया है।
पैसे नहीं देने पर मारपीट का आरोप
कैदी ने दावा किया कि कई मामलों में भुगतान ऑनलाइन माध्यम से कराया जाता है। वायरल सामग्री में कुछ स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं। आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने पर कैदियों के साथ मारपीट की जाती है और परिवार या वकील से मुलाकात में परेशानियां खड़ी की जाती हैं।
एक अन्य वीडियो में भी एक कैदी ने जेल में पैसे मांगने और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। उसने हाथ-पैर पर चोट के निशान दिखाते हुए दावा किया कि रुपये नहीं देने पर उसके साथ मारपीट हुई और उसे गंभीर चोटें आईं।
VIP कैदियों को सुविधा देने का भी आरोप
वीडियो में कैदियों ने आरोप लगाया कि जेल में VIP कैदियों को बेहतर सुविधाएं और उपचार उपलब्ध कराया जाता है, जबकि अन्य कैदियों से कथित तौर पर पैसे की मांग की जाती है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चार प्रहरियों के नाम लेने का दावा
पहले वायरल वीडियो में एक कैदी ने मन्नत पुरैना, टेकराम, मिथिलेश और राजू साहू नाम के प्रहरियों पर आरोप लगाए हैं। वीडियो में कुछ प्रहरियों के लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ होने का दावा भी किया गया है।
जेल प्रबंधन ने वीडियो की प्रामाणिकता से किया इनकार
मामले में रायपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री ने वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि यह अभी सुनिश्चित नहीं है कि वीडियो वास्तव में जेल परिसर का ही है। उन्होंने कहा कि जेल में हजारों कैदी और 200 से ज्यादा स्टाफ हैं, ऐसे में वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसकी अभी पुष्टि नहीं की जा सकती।
फिलहाल वायरल वीडियो में लगाए गए वसूली और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र जांच या पुष्टि सामने नहीं आई है।
