रायपुर । कृषि महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा संचालित ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पिरदा के महिला भवन में ग्राम सूचना केंद्र एवं पौध स्वास्थ्य परामर्श केंद्र का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का प्रसार, फसल संबंधी समस्याओं का समाधान, नवीन कृषि जानकारी उपलब्ध कराना तथा सतत एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. दीप्ति पटेल ने बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा ग्राम में अब तक किए गए कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी किसानों के साथ मिलकर कृषि सर्वेक्षण, फसल निदान, तकनीकी परामर्श, ग्रामीण समस्याओं के अध्ययन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार का कार्य कर रहे हैं।
डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, रायपुर ने अपने उद्बोधन में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या रहती है, वहाँ पपीते जैसी फसलों के स्थान पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अन्य फलदार वृक्ष लगाए जाने चाहिए। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को घर पर वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने, जैविक खेती अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने किसानों की विपणन संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक विपणन व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम के प्रगतिशील किसान श्री विजय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कृषि महाविद्यालय के बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा नवीन कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक जानकारी को गाँव तक पहुँचाने का कार्य किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर किसानों को वर्मी कम्पोस्ट आधारित ट्राइकोडर्मा जैव एजेंट किट के नमूने वितरित किए गए। डॉ. ऐश्वर्या टंडन, प्राध्यापक, कृषि महाविद्यालय, रायपुर ने किसानों को इसके उपयोग की विधि, लाभ, फसलों में रोग प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार में इसकी उपयोगिता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने किसानों को जैविक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा जैव एजेंटों के नियमित उपयोग से फसलों को मृदा एवं जनित रोगों से सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, बी.एससी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम से जुड़े छात्र-छात्राएँ तथा बड़ी संख्या में ग्राम पिरदा के कृषकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
