भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई


भिलाई  सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) द्वारा विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से अलंकृत लोककला की अप्रतिम साधिका तथा संयंत्र की पूर्व कर्मी तीजन बाई की स्मृति में इस्पात भवन के सभागार में एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी सभा में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दिवंगत लोक कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए भारतीय लोकसंस्कृति तथा पंडवानी परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान को अत्यंत आदर के साथ स्मरण किया। इस शोक सभा में मुख्य रूप से कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) संजय द्विवेदी सहित क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं, संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क तथा मानव संसाधन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, ओजस्वी प्रस्तुति और विशिष्ट पंडवानी शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को अपनी जीवंत कला से प्रस्तुत करने वाली तीजन बाई की कला सदैव अमर रहेगी और उनका अवसान भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वहीं महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने उनके जीवन को कला-साधना, संघर्ष और समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में मुंबई के एक फिल्मकार द्वारा उनके जीवन और कृतित्व पर एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान ओलंपियन एवं उप महाप्रबंधक (क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं) राजेन्द्र प्रसाद ने भिलाई इस्पात संयंत्र में तीजन बाई के कार्यकाल के दौरान की पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने उनके अत्यंत सरल व्यक्तित्व, कला के प्रति अटूट निष्ठा तथा संयंत्र परिवार से उनके गहरे व आत्मीय जुड़ाव को याद किया। कार्यक्रम का संचालन सुप्रियो सेन द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने तीजन बाई के जीवन वृत्त और उनकी कला यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दिवंगत पुण्यात्मा को विनम्र विदाई देते हुए उनके सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।


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